डेरा स्वामी जगत गिरी जी का प्राचीन इतिहास और पावन विरासत
डेरा स्वामी जगत गिरी जी पठानकोट का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है, जो एक सनातन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस परंपरा में गुरुजन सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर मानवता के कल्याण हेतु जीवन समर्पित करते थे। ऐसे संतों को रमता योगी कहा जाता था। वे स्थान-स्थान पर भ्रमण कर सतगुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं का प्रचार करते थे।
गुरु परंपरा का इतिहास
स्वामी दित्त तारिउ जी एक महान साधक थे। उन्होंने तेईस गुरुओं के चरणों में जाकर सत्य की खोज की, परंतु पूर्ण शांति उन्हें इस दिव्य परंपरा से नामदान प्राप्त होने के बाद ही मिली। इसके पश्चात गुरु-परंपरा अविच्छिन्न रूप से आगे बढ़ती रही:
- गुरु दित्त तारिउ स्वामी जी
- गुरु गुलाब गिरी स्वामी जी
- गुरु लाछी गिरी स्वामी जी
- गुरु मोती गिरी स्वामी जी
- गुरु तोता गिरी स्वामी जी
- गुरु रतन गिरी स्वामी जी
- गुरु शंभू गिरी स्वामी जी
- गुरु सुखे गिरी स्वामी जी
- गुरु बुध गिरी स्वामी जी
स्वामी शिंगारा गिरी जी महाराज
स्वामी शिंगारा गिरी जी महाराज का जन्म 27 फरवरी 1838 को ग्राम बारोटी, तहसील शकरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। उन्हें गुरु बुध गिरी जी महाराज से नामदान प्राप्त हुआ। विभाजन उपरांत वे पालौटा साहिब (रामगढ़, जम्मू-कश्मीर) पहुँचे, जहाँ गुरु गद्दी की स्थापना की गई।
यहाँ भंडारों, सत्संग और सिमरन के माध्यम से समानता और सेवा का संदेश दिया गया। 15 जून 1934 को गुरु गद्दी स्वामी जैग गोपाल गिरी जी महाराज को सौंपकर उन्होंने देह त्याग किया।
स्वामी जैग गोपाल गिरी जी महाराज का बलिदान
स्वामी जैग गोपाल गिरी जी महाराज का जन्म 17 फरवरी 1908 को पालौटा साहिब में हुआ। 1947 के विभाजन काल में उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा हेतु सर्वोच्च बलिदान दिया।
"सूरा सो पहिचानिए, जो लड़े दीन के हेत।
पुरजा-पुरजा कट मरे, कबहूँ न छोड़े खेत।" – संत कबीर
स्वामी जगत गिरी जी महाराज और डेरा पठानकोट
स्वामी जैग गोपाल गिरी जी महाराज के पश्चात स्वामी जगत गिरी जी महाराज ने गुरु गद्दी संभाली। उन्होंने पठानकोट में तपोस्थली की स्थापना की, जहाँ गुरु रविदास जी महाराज की अमृतवाणी का निरंतर पाठ होता है।
स्वामी गुरदीप गिरी जी महाराज: आधुनिक युग के मार्गदर्शक
स्वामी गुरदीप गिरी जी महाराज का जन्म 7 फरवरी 1961 को जिला गुरदासपुर (पंजाब) में हुआ। 14 वर्ष की आयु में गुरु गद्दी संभालकर उन्होंने डेरा को सामाजिक-शैक्षणिक आंदोलन का रूप दिया।
डेरा स्वामी जगत गिरी चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा, सेवा और सामाजिक उत्थान के अनेक कार्य किए जा रहे हैं।
ड्रीम प्रोजेक्ट और बेगमपुरा की ओर
गरीब और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोलने हेतु लगभग 70 एकड़ भूमि पर शिक्षण संस्थानों की स्थापना स्वामी गुरदीप गिरी जी महाराज का स्वप्न है। यह प्रयास सतगुरु रविदास जी महाराज के बेगमपुरा के आदर्श को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आज डेरा स्वामी जगत गिरी जी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि त्याग, सेवा, समानता और मानव गरिमा का जीवंत केंद्र है—जो शिरोमणि सतगुरु रविदास जी महाराज की शाश्वत शिक्षाओं से प्रेरित है और पूरी दुनिया में सतगुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं का प्रचार कर रहा है
इसका श्रेय डेरा के मौजूदा गद्दीनशीन हजूर महाराज स्वामी गुरदीप गिरी जी को जाता है ।
📍 डेरा स्वामी जगत गिरी जी – स्थान
डेरा स्वामी जगत गिरी जी महाराज (सतगुरु रविदास वर्ल्ड पीस टेम्पल)
पठानकोट, पंजाब, भारत
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